हद हो गई: एएसआई ने आरटीआई की सत्यापित प्रति देने के बदले मांगी रिश्वत और पकड़े गए
पुलिस विभाग के एएसआई ने हदें पार कर दी।सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सत्यापित प्रति देने के बदले ही पुलिसकर्मी ने रिश्वत मांग ली। एएसआई को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने धर दबोचा। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।

सीधी के मझौती थाना में पदस्थ एएसआई को रीवा लोकायुक्त ने पकड़ा
रीवा। लोकायुक्त रीवा ने सीधी जिला के मझौली थाना में पदस्थ एएसआई को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा है। उप निरीक्षक कमलेश त्रिपाठी ने यह रिश्वत आरटीआई की सत्यापित प्रति देने के लिए मांगे थे। दरअसल मझौती तहसील के टेकर निवासी पंकज कुमार तिवारी ने 23 अगस्त को थाना में पूर्व में दिए गए चेक गुमने के आवेदन की सत्यापित प्रति मांगी थी। आरटीआई लगाया था। इसी आरटीआई के तहत सत्यापित प्रति देने के बदले एएसआई ने 50 हजार रुपए की मांग की थी। रुपए मांगे जाने पर शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत लोकायुक्त रीवा से की। लोकायुक्त एसपी ने इस मामले की सत्यता की जांच कराई। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद एएसआई को ट्रैप करने के लिए रणनीति तैयार की गई। पहली किश्त की राशि 20 हजार रुपए लेकर शिकायतकर्ता को एएसआई कमलेश त्रिपाठी के पास भेजा गया। जैसे ही एएसआई ने रुपए लिए वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने उन्हें धरदबोचा। एएसआई को पकडऩे के बाद आगे की कार्रवाई सीधी विश्रामगृह में की गई। एएसआई पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।
बिना रुपए के एक काम नहीं करते पुलिसकर्मी
थानों में लूटखसोट मची हुई है। पीडि़तों को न्याय पाने के लिए भी पुलिस थाना में चढ़ोत्तरी देनी पड़ती है। पुलिसकर्मियों पर लगातार रिश्वत मांगने के आरोप लगते ही रहते हैं। अब इस बार तो एएसआई ने हदें ही पार कर दी। आरटीआई के तहत सत्यापित प्रति देने का नियम होने के बाद भी रिश्वत की मांग कर डाली। गुमे चेक की राशि अधिक होने के कारण ही एएसआई का लालच बढ़ गया था।