ठगे गए रीवा वाले, करोड़ों की जमीन गई, सबसे बड़े पार्क का सपना दिखाया अब इसे देख ही सकेंगे अंदर जाने पर पैसे लगेंगे

करोड़ों की जमीन चली गई। रीवा को 10 एकड़ में बने अटल पार्क का सपना दिखाया गया। जनता खुश थी कि कुछ तो मिला। अब यह अटल पार्क का सपना भी सिर्फ सपना ही बन कर रह जाएगा। बच्चों के साथ पार्क घूमने जाने वाली रीवा की जनता को टिकट खरीदना पड़ेगा। नगर निगम के पार्षद और जनप्रतिनिधियों ने जनता को ठग लिया है। जल्द ही किराया लगेगा। अब इसे बाहर से देखने को पैसा नहीं लगेगा। टेंडर भी निकाला जा चुका है।

ठगे गए रीवा वाले, करोड़ों की जमीन गई, सबसे बड़े पार्क का सपना दिखाया अब इसे देख ही सकेंगे अंदर जाने पर पैसे लगेंगे
atal park

रीवा। पुर्नघनत्वीकरण योजना के तहत सिविल लाइन में अफसरों के बंगलों को तोड़कर अटल पार्क का निर्माण कराया गया। यही पर 22 दुकानें भी बनाई गईं। इस पार्क के बनने से लोगों को परिवार के साथ घूमने फिरने के लिए एक जगह मिल गई थी। कुछ दिनों तक तो लोगों को इस अटल पार्क की फ्री सेवा दी गई। अब समय गुजरने से नगर निगम और जनप्रतिनिधि अपने असली रंग में आ गए हैं। नगर निगम के 15वें सम्मिलन में इस पार्क को निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव भी रख दिया। जनप्रतिनिधियों ने इसे हरी झंडी भी दिखा दी। हद तो यह है कि हैंडओव्हर के पहले ही अटल पार्क के लिए टेंडर प्रक्रिया नगर निगम ने शुरू कर दी थी। अब इसे अमली जामा पहनाने की कोशिश की जा रही है। 

बड़े हाथों में ही देने की तैयारी

अटल पार्क के लिए टेंडर निकाला गया है। इसमें शर्तें ऐसी रखी गई है जो रीवा के छोटे ठेकेदारों और बेरोजगार युवकों की पहुंच से बाहर है। इसे भी बाहरी और बड़े ठेकेदार को ही देने की पहले ही योजना तैयार कर ली गई है। ऐसी शर्तें रखी गई है जो छोटे ठेकेदार के बस में नहीं है। पहले ही ऑडिटोरियम समदडिय़ा को दिया जा चुका है। पीछे की बाउण्ड्री तोड़ी जा चुकी है। अब कयास लगाया जा रहा है कि अटल पार्क को भी समदडिय़ा को ही दे दिया जाएगा। अटल पार्क का निर्माण भी उसे ने कराया था अब संचालन भी वहीं करेगा।