6 सालों से एक ही फीडर में डटी हैं जेई, संविदा लाइनमैन 12 साल से हटा ही नहीं

विद्युत विभाग में शिल्पी प्लाजा फीडर बिजली चोरी और लाइन लॉस के मामले में सबसे ऊपर है। यह रीवा का सबसे अधिक खपत वाला क्षेत्र हैं। यहां पदस्थ जेई पिछले 6 साल और संविदा लाइनमैन 12 सालों से पदस्थ हैं। यह दोनों शहर से हटे ही नहीं। अधिकारियों की मिली भगत से ही रीवा शहर में बिजली चोरी बढ़ रही है।

6 सालों से एक ही फीडर में डटी हैं जेई, संविदा लाइनमैन 12 साल से हटा ही नहीं
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जेई सिखा तिवारी शिल्पी प्लाजा फीडर छोडऩे को तैयार ही नहीं

संविदा लाइनमैन घनश्याम सिंह 12 सालों से रीवा शहर में डटा है

रीवा। बिजली विभाग में सभी अधिकारियों ने अपने कमाई का क्षेत्र बाट लिया है। अधिकारी खुल कर बैटिंग कर रहे हैं। शिल्पी प्लाजा मालदार क्षेत्र हैं। यहां सबसे अधिक दुकानें हैं। बड़े बड़े व्यापारी हैं। बिजली की अधिक खपत और चोरी भी होती है। यही वजह है कि यह फीडर विद्युत विभाग के इंजीनियरों को खूब पसंद आता है। शिल्पी प्लाजा फीडर के लिए जेई शिखा तिवारी एढ़ी चोटी का जोर लगा चुकी है। इन्हें बीच में इस फीडर से हटाया गया था, तब सिफारिश के लिए पति भी सामने आए थे। सूत्रों की मानें तो जेई शिखा तिवारी पिछले 6 सालों से एक ही फीडर में जमीं है और कई सालों से रीवा शहर में पदस्थ हैं। इन्हें यहां से हटाया ही नहीं गया। अब इन्हीं के क्षेत्र में जीरो बिलिंग के मामलों ने इस फीडर मोह का भांडाफोड़ कर दिया है। 

पति भी विद्युत विभाग में हैं पदस्थ

जेई शिखा तिवारी के पति भी इंजीनियर हैं। वह भी विद्युत विभाग शहर संभाग में ही पदस्थ हैं। उनका नाम विमलेश तिवारी है। वह एई के पद पर पदस्थ हंै। अभी उन्हें क्षेत्र नहीं मिला है। इसके पहले विमलेश तिवारी अधीक्षण अभियंता कार्यालय में पदस्थ थे। वहीं से अपनी पत्नी को बैकअप प्रदान कर रहे थे। अब उनके साथ शहर संभाग में हैं। 

घनश्याम 12 सालों से एक ही जगह पर है

शहर संभाग में घनश्याम सिंह संविदा लाइनमैन है। यह वर्ष 2012 से नियुक्ति दिनांक से यहीं पर पदस्थ हैं। अधिकांश अधिकारी, कर्मचारी इधर से उधर हो गए लेकिन इसकी जगह और डिवीजन नहीं बदली। ऐसा नहीं है कि घनश्याम सिंह बहुत ही मेहनती और होशियार संविदा लाइन मैन हैं। यह सिर्फ अधिकारियों के खास हैं। डीई से लेकर एई, जेई तक घनश्याम को हाथों हाथ लेते हैं। कार्रवाई कहीं भी किसी भी डिवीजन में होती है लेकिन वहां अधिकारी इस कर्मचारी को लेकर जाते हैं। पहले मीटर में छेडख़ानी जैसे प्रकरणों को निपटाने में भी इनका नाम खूब सुर्खियों में आया था। तब से यह विभाग में जितने भी उलजलूल काम हैं सभी के मास्टरमाइंड बने बैठे हैं।

हाथो हाथ ले लेते हैं ठेका

विद्युत विभाग में वैसे तो कई ठेकेदार हैं लेकिन इस समय कर्मचारी ही सारा काम करते हैं। कहीं भी प्राइवेट फर्म में ट्रांसफार्मर लगाना होता है तो शहर संभाग में पदस्थ अधिकारी सीधे घनश्याम ङ्क्षसह को ही याद करते हैं। घनश्याम सिंह एक ठेकेदार के लाइंसेंस पर ही पूरा काम कर देता है। जो भी प्राफिट होता है, वह आपस में बांट लेते हैं। रीवा में इन अधिकारियों और कर्मचारियों का बड़ा जाल है। इसे कोई तोड़ नहीं पा रहा है। 

चोरहटा फीडर में अजय मिश्रा ने जमा रखी है पकड़

इन दो अधिकारी, कर्मचारियों की तरह ही एक नाम अजय मिश्रा आपरेटर से जेई बने हैं उनका भी है। इन्हें पहले मनगवां स्थानांतरित कर दिया गया था। मनगवां में कमाई नहीं थी। उपरी खर्च नहीं निकल पा रहा था। इन्हें जोड़तोड़ किया और पूर्व मुख्य अभियंता आईके त्रिपाठी से ही आदेश कराकर वापस चोरहटा इंडस्ट्रियल एरिया में पदस्थ हो गए। अब वहां इन्हीं का राज चलता है। यह वैसे तो आपरेटर हैं लेकिन इनका जलवा देखकर कोई भी दंग रह जाएगा। यह अधिकारियों को भी फेल कर देते हैं। गाड़ी, बंगला सब चोरहटा फीडर से ही मेंटेन किए हुए हैं।